नात लिरिक्स

Murshidan-e-Kalpi Ka Kya Saja Darbar Hai

मुर्शिदान-ए-कालपी का क्या सजा दरबार है

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरीशायर: मुफ़्ती रजब अली क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुर्शिदान-ए-कालपी का क्या सजा दरबार हैजिस तरफ़ भी देखिए इक बारिश-ए-अनवार है

मय-कदा पीरान-ए-तिर्मिज़ का खुला है, मय-कशो !बादा-नोशी के लिए दौड़ो बड़ी सरकार है

ये नहीं वो बादा जिस को पी के बहकें बादा-नोशमस्त-ए-जाम-ए-क़ादरियत पी के भी होशियार है

ये ज़मीं जन्नत-निशाँ है मेरे पीरों के तुफ़ैलमिल गई ये ख़ाक जिस को उस का बेड़ा पार है

दर्द की लज़्ज़त को अहल-ए-दर्द ही हैं जानतेवो मरीज़ अच्छा जो उन के दर्द का बीमार है

हज़रत-ए-सय्यिद मुहम्मद क़ुत्ब-अक़्ताब-ए-ज़माँकालपी में चाँद जिन के फ़ैज़ का ज़ौ-बार है

सय्यिद अहमद शाह फ़ज़्लुल्लाह की गर हो नज़रडूबने वाले का बस दम-भर में बेड़ा पार है

होशियार, ऐ अहल-ए-सुन्नत ! इम्तिहाँ का वक़्त हैफ़ितनाहा-ए-नज्दियत की हर तरफ़ भरमार है

बादा-ए-बे-कैफ़-ए-नज्दियत है नज्दी के लिएसाग़र-ए-मारहरा पी कर अपना दिल सरशार है

कैसे कैसे कामिलान-ए-दहर का मैं हूँ ग़ुलामफ़िक्र-ए-फ़र्दा क्या करूँ मैं रब मेरा ग़फ़्फ़ार है

ऐ मेरे पीरान-ए-'आली-मर्तबत ! चश्म-ए-करमआप का मँगता रजब मग़्मूम-ओ-पुर-अफ़्कार है

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