नात लिरिक्स

Mujh Ko Bhi Kabe Ka Ab Haji Bana De Maula

मुझ को भी काबे का अब हाजी बना दे मौला

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

का'बा दिखा दे, मौला ! हज पे बुला ले, मौला !

तेरे घर के फेरे लगाता रहूँ मैंसदा शहर-ए-मक्का में आता रहूँ मैं

हरम में, मैं हाज़िर हुआ बन के मुजरिमये लब्बैक ना'रा लगाता रहूँ मैं

मुझ को भी का'बे का अब हाजी बना दे, मौला !शहर-ए-तयबा की ज़ियारत भी करा दे, मौला !

मुझ को भी का'बे का अब हाजी बना दे, मौला !

मैं रहूँ और मेरे साथ हों अहल-ए-ख़ानाएक हज ऐसा मुझे भी तू करा दे, मौला !

शहर-ए-तयबा की ज़ियारत भी करा दे, मौला !

मुझ को भी का'बे का अब हाजी बना दे, मौला !

हाज़िरी के लिए फ़रियादी है आँसू आँसूये तमन्ना मेरी अब जल्द मिटा दे, मौला !

शहर-ए-तयबा की ज़ियारत भी करा दे, मौला !

मुझ को भी का'बे का अब हाजी बना दे, मौला !

हम्द और ना'त ही मैं पढ़ता रहूँ हर लम्हामुझ से 'आसी को वो तौफ़ीक़-ए-सना दे, मौला !

शहर-ए-तयबा की ज़ियारत भी करा दे, मौला !

मुझ को भी का'बे का अब हाजी बना दे, मौला !

तुझ से फ़रियाद यही शौक़-ए-फ़रीदी की हैसाथ माँ-बाप के अब का'बा दिखा दे, मौला !

शहर-ए-तयबा की ज़ियारत भी करा दे, मौला !

मुझ को भी का'बे का अब हाजी बना दे, मौला !

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