नात लिरिक्स

Mere Soone Soone Ghar Ko Khuld Banaen Aaqa

मेरे सूने सूने घर को ख़ुल्द बनाएँ आक़ा

नात ख़्वान: सय्यिद शजर अली मकनपुरीशायर: सय्यिद शजर अली मकनपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे सूने सूने घर को ख़ुल्द बनाएँ आक़ाकाश ! हमारी क़िस्मत चमके, ख़्वाब में आएँ आक़ा

लकड़ी को तलवार बनाएँ, पेड़ बुलाएँ आक़ाचाँद करें दो टुकड़े और सूरज पलटाएँ आक़ा

उन की 'अज़मत का अंदाजा कैसे लगाए कोईगोद में जिन को मौला उठाएँ, झूला झुलाएँ आक़ा

ना-मुमकिन है आग जहन्नम की उस को छू पाएजिस के दिल में 'इश्क़ की अपने शम'अ जलाएँ आक़ा

नाम शजर हो क्यूँ फूलों का ? ज़िक्र हो क्यूँ गुलशन का ?अपने पसीने की ख़ुश्बू से जब महकाएँ आक़ा

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