नात लिरिक्स

Madar Mohe Mori Bigdi Bana Do

मदार मोहे मोरी बिगड़ी बना दो

शायर: सय्यिद शजर अली मकनपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आज हमने उन्हें पुकारा हैबे-सहारों का जो सहारा है

मेरी ख़ुश-नसीबी के आसार नज़र आते हैंसामने ज़िंदा शाह मदार नज़र आते हैं

मदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दोमदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दो

व्याकुल मनवा, तरसत नैनाहम को दरस दिखला दो

मदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दोमदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दो

हर-सू है दुख-दर्द का मेलादुख हैं हज़ारों और मैं अकेलाझर-झर अखियाँ नीर बहावेदूर करो ये दर्द का रेला

तूफ़ाँ में है नय्या हमारीइस को पार लगा दो

मदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दोमदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दो

जीवन की पथरीली राहेंपाँव में छाले, लब पे हैं आहेंमिल जाए मंज़िल राही कोशाह बदी'उद्दीन जो चाहें

मील के पत्थर दिखते नहीं हैंराह हमें दिखला दो

मदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दोमदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दो

व्याकुल मनवा, तरसत नैनाहम को दरस दिखला दो

मदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दोमदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दो

तोरे दर पर ये दीवानेशम'-ए-मोहब्बत के परवानेताक रहे हैं तेरा रस्तातेरे 'आशिक़ और मस्ताने

'उर्स की रुत है, मुख से अपनेपर्दा आज हटा दो

मदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दोमदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दो

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, 'ईसाईसब हैं यहाँ पर भाई-भाईमन की मुरादें आ कर दर परजिस ने जो माँगी वो पाई

सिम्त-ए-शजर है दर कि जानी !चश्म-ए-करम फ़रमा दो

मदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दोमदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दो

व्याकुल मनवा, तरसत नैनाहम को दरस दिखला दो

मदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दोमदार मोहे ! मोरी बिगड़ी बना दो

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।