नात लिरिक्स

Aye Madar-al-wara Bas Tumhare Siwa Hum Ghareebon Ka Koi Sahara Nahin

ऐ मदार-अल-वरा बस तुम्हारे सिवा हम ग़रीबों का कोई सहारा नहीं

नात ख़्वान: सय्यिद शजर अली मकनपुरीशायर: सय्यिद शजर अली मकनपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ मदार-अल-वरा ! बस तुम्हारे सिवा हम ग़रीबों का कोई सहारा नहींहम तो खाते हैं सदक़ा तुम्हारा, शहा ! छोड़ कर दर है अपना गुज़ारा नहीं

तुम हो नूर-ए-मुहम्मद की नूरी किरन, तुम से रौशन है ये ख़ल्क़ की अंजुमनहै तुम्हारी ही ख़ुश्बू चमन-दर-चमन, कौन सी शय है जिस पर इजारा नहीं

इख़्तियार ऐसा रब्ब-ए-जहाँ ने दिया, जिस की चाहो करो सल्ब तुम क़ुत्बियतकोई बनता नहीं तब तलक है वली, जब तलक तुम हो करते इशारा नहीं

जब तलक ज़िंदगी है, मदार-ए-जहाँ ! सरवर-ए-हर-दो-'आलम पे क़ुर्बां हूँ मैंआप का क़ौल इस दिल में तहरीर है, जो नबी का नहीं वो हमारा नहीं

ज़ुल्म करने से पहले ज़रा जान लो, हैं हमारे निगहबाँ मदार-ए-जहाँहैं सहारा हमारा मदार-ए-जहाँ, हम नहीं वो कि जिन का सहारा नहीं

हुस्न-ए-ख़ज़रा भी है, नूर-ए-का'बा भी है और अबाबील का दर पे पहरा भी हैहैरती हैं ये अहल-ए-नज़र देख कर, सारी दुनिया में ऐसा नज़ारा नहीं

क़ुत्ब-ए-'आलम हैं कितने सख़ी, ऐ शजर ! झोलियाँ पल में देते हैं सरकार भरख़ाली दामन लिए लौट जाए कोई, मेरे सरकार को ये गवारा नहीं

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