नात लिरिक्स

Hasbi Rabbi Jallallah | Tere Sadqe Mein Aaqa Sare Jahan Ko Deen Mila

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह | तेरे सदक़े में आक़ा सारे जहाँ को दीन मिला

नात ख़्वान: सय्यिद शजर अली मकनपुरीशायर: सय्यिद शजर अली मकनपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

तेरे सदक़े में, आक़ा ! सारे जहाँ को दीन मिलाबे-दीनों ने कलमा पढ़ा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

सिम्त-ए-नबी बू-जहल गया, आक़ा से उस ने ये कहागर हो नबी बतलाओ ज़रा, मेरी मुट्ठी में है क्या ?आक़ा का फ़रमान हुआ और फ़ज़्ल-ए-रहमान हुआमुट्ठी से पत्थर बोला, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

अपनी बहन से बोले 'उमर, ये तो बता क्या करती थी ?मेरे आने से पहले क्या चुपके चुपके पढ़ती थी ?बहन ने जब क़ुर'आन पढ़ा, सुन के कलाम-ए-पाक-ए-ख़ुदादिल ये 'उमर का बोल उठा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

वो जो बिलाल-ए-हब्शी है, सरवर-ए-दीं का प्यारा हैदुनिया के हर 'आशिक़ की आँखों का वो तारा हैज़ुल्म हुए कितने उस पर, सीने पर रखा पत्थरफिर भी लब पर जारी था, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

मेरे नबी के ग़ुलामों का रुत्बा बड़ा है, शान बड़ीचाहे ग़ौस-ए-आ'ज़म हों या कि दाता हजवेरीयाद नहीं तुम्हें वो मंज़र ! ख़्वाजा ने जब ख़ुद चल करनव्वे लाख़ को पढ़वाया, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

मेरे मौला ! मेरे ख़ुदा ! तू ही ख़ालिक़-ए-अर्ज़-ओ-समातू ही मालिक-ए-रोज़-ए-जज़ा, मैं हूँ सरापा जुर्म-ओ-ख़ताफिर भी तुझ से है ये दु'आ, वक़्त-ए-नज़ा' जब आए मेरालब पे हो बस एक सदा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

दुनिया के इंसान कई शिर्क-ओ-बिद'अत करते थेरब के थे बंदे फिर भी बुत की 'इबादत करते थेबुत-ख़ानें हैं थर्राए, मेरे नबी हैं जब आएकहने लगी मख़्लूक़-ए-ख़ुदा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

कलमा रहमत वाला है, कलमा बरकत वाला हैकलमे की बरकत से ही हर इक घर में उजाला हैउस की क़िस्मत खुलती है, उस को जन्नत मिलती हैमरते दम जिस ने भी पढ़ा ला-इलाहा-इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

सिब्त-ए-नबी है सज्दे में, तीरों की बौछारें हैंऔर यज़ीदी लश्कर के हाथों में तलवारें हैंकर्ब-ओ-बला में जब के था, तेरे नवासे का सज्दासारा ज़माना बोल उठा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

गुलशन कलमा पढ़ते हैं, चिड़िया कलमा पढ़ती हैदुनिया की मख़्लूक़ सभी ज़िक्र ख़ुदा का करती हैकहते सभी हैं जिन्न-ओ-बशर, कहता शजर है कहता हजरकहता है पत्ता पत्ता, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाहनूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह

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