नात लिरिक्स

Maula Ki Rehmaton Ka Khazeena Nazar Mein Hai

मौला की रहमतों का ख़ज़ीना नज़र में है

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: हाफ़िज़ मज़हरुद्दीन मज़हरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मौला की रहमतों का ख़ज़ीना नज़र में हैसल्ले-'अला कि शहर-ए-मदीना नज़र में है

तूफ़ाँ नज़र में है न सफ़ीना नज़र में हैतेरा करम ही, शाह-ए-मदीना ! नज़र में है

देखे कोई हुज़ूर की बंदा-नवाज़ियाँमुझ सा ज़लील, मुझ सा कमीना नज़र में है

हुस्न-ए-अज़ल फ़रोग़-ए-अबद देखता हूँ मैंरंगीनी-ए-जमाल-ए-मदीना नज़र में है

या रब ! नवाज़ दौलत-ए-सोज़-ओ-गुदाज़ सेबू-ज़र का दिल, बिलाल का सीना नज़र में है

बिन्त-ए-रसूल ! तेरी ग़िज़ा याद है मुझेनान-ए-श'ईर-ओ-नान-ए-शबीना नज़र में है

जिस में 'अरब का मेहर-ए-मुबीं जल्वा-गर हुआसदियों के बा'द भी वो महीना नज़र में है

अब मेरी चश्म-ए-शौक़ पहुँचती है 'अर्श तकमे'राज जाने वाले का ज़ीना नज़र में है

बंदा-नवाज़ ! बंदा-नवाज़ी से काम लेबंदा-नवाज़ियों का क़रीना नज़र में है

दिल क्या है ? एक मख़ज़न-ए-असरार-ए-मुस्तफ़ाये गंज-ए-मा'रिफ़त, ये ख़ज़ीना नज़र में है

मज़हर ! तसव्वुरात की दुनिया है 'इत्र-बेज़महबूब-ए-किब्रिया का पसीना नज़र में है

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