नात लिरिक्स

Marhaba Wo Noor Wala Aa Gaya | Kya Suhana Waqt Hai Duniya Mein Aana Noor Ka

मरहबा वो नूर वाला आ गया | क्या सुहाना वक़्त है दुनिया में आना नूर का

नात ख़्वान: असद इक़बाल कलकत्तवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मरहबा वो नूर वाला आ गयामरहबा वो नूर वाला आ गया

क्या सुहाना वक़्त है दुनिया में आना नूर काहो मुबारक, 'आशिक़ो ! तशरीफ़ लाना नूर कादीदा-ए-बे-नूर ने देखा ज़माना नूर कागूँजता है सारे 'आलम में तराना नूर का

मरहबा वो नूर वाला आ गयामरहबा वो नूर वाला आ गया

क्या बयाँ हो शाह-ए-बतहा के हसीं एहसान काआदमी देखेगा चेहरा इक नए इंसान काढल रहा है पुर्ज़ा पुर्ज़ा ज़ेवर-ए-ईमान काक्या मदीने में लगा है कारख़ाना नूर का

मरहबा वो नूर वाला आ गयामरहबा वो नूर वाला आ गया

नय्यर-ए-चर्ख़-ए-शहादत मुस्तफ़ा के नूर-ए-'ऐनदिलबर-ए-मौला 'अली हैं फ़ातिमा ज़हरा के चैनएक धागा हैं हसन तो दूसरे आक़ा हुसैनचादर-ए-ततहीर का हर ताना-बाना नूर का

मरहबा वो नूर वाला आ गयामरहबा वो नूर वाला आ गया

अहल-ए-सुन्नत का 'अक़ीदा ख़ूब ये रौशन हुआमुस्तफ़ा के नूर ही से नूर का है सिलसिलाआ'ला हज़रत का ये मिस्रा' क़ौल-ए-फ़ैसल बन गयातू है 'ऐन-ए-नूर तेरा सब घराना नूर का

मरहबा वो नूर वाला आ गयामरहबा वो नूर वाला आ गया

तितलियाँ हुस्न-ए-करम पे ख़ूब इतराने लगींशाख़-ए-मिदहत पर मचल कर बुलबुलें गाने लगींजैसे जन्नत की बहारें रक़्स फ़रमाने लगींइक ज़रा सी बात पर यूँ मुस्कुराना नूर का

मरहबा वो नूर वाला आ गयामरहबा वो नूर वाला आ गया

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