नात लिरिक्स

Main To Khud Unke Dar Ka Gada Hoon | Apne Aaqa Ko Main Nazr Kya Doon

मैं तो ख़ुद उन के दर का गदा हूँ | अपने आक़ा को मैं नज़्र क्या दूँ

नात ख़्वान: सय्यिद ख़ालिद हुसैन शाहशायर: इक़बाल अज़ीमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं तो ख़ुद उन के दर का गदा हूँ, अपने आक़ा को मैं नज़्र क्या दूँअब तो आँखों में भी कुछ नहीं है वर्ना क़दमों में आँखें बिछा दूँ

आने वाली है उन की सवारी, फूल ना'तों के घर घर सजा दूँमेरे घर में अँधेरा बहुत है, अपनी पलकों पे शम'एँ जला दूँ

मेरी झोली में कुछ भी नहीं है, मेरा सरमाया है तो यही हैअपनी आँखों की चाँदी बहा दूँ, अपने माथे का सोना लुटा दूँ

बे-निगाही पे मेरी न जाएँ, दीदा-वर मेरे नज़दीक आएँमैं यहीं से मदीना दिखा दूँ, देखने का सलीक़ा सीखा दूँ

रौज़ा-ए-पाक पेश-ए-नज़र है, सामने मेरे आक़ा का दर हैमुझ को क्या कुछ नज़र आ रहा है, तुम को लफ़्ज़ों में कैसे बता दूँ

मेरे आँसू बहुत क़ीमती हैं, इन से वाबस्ता हैं उन की यादेंइन की मंज़िल है ख़ाक-ए-मदीना, ये गौहर यूँही कैसे लुटा दूँ

मुझ को, इक़बाल ! निस्बत है उन से, जिन का हर लफ़्ज़ जान-ए-सुख़न हैमैं जहाँ ना'त अपनी सुना दूँ, सारी महफ़िल की महफ़िल जगा दूँ

मैं फ़क़त आप को जानता हूँ और उसी दर को पहचानता हूँइस अँधेरे में किस को पुकारूँ, आप फ़रमाएँ किस को सदा दूँ

मेरी बख़्शिश का सामाँ यही है और दिल का भी अरमाँ यही हैएक दिन उन की ख़िदमत में जा कर, उन की ना'तें उन्हीं को सुना दूँ

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