नात लिरिक्स

Khula Hai Sabhi Ke Liye Baab-e-Rehmat

खुला है सभी के लिए बाब-ए-रहमत

नात ख़्वान: क़ारी वहीद ज़फ़र क़ासमीशायर: इक़बाल अज़ीमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

खुला है सभी के लिए बाब-ए-रहमत, वहाँ कोई रुत्बे में अदना न 'आलीमुरादों से दामन नहीं कोई ख़ाली, क़तारें लगाए खड़े हैं सवाली

मैं पहले-पहल जब मदीने गया था, तो थी दिल की हालत तड़प जाने वालीवो दरबार सच-मुच मेरे सामने था, अभी तक तसव्वुर था जिस का ख़याली

जो इक हाथ से दिल सँभाले हुए था, तो थी दूसरे हाथ में उन की जालीदु'आ के लिए हाथ उठते तो कैसे ! न ये हाथ ख़ाली, न वो हाथ ख़ाली

जो पूछा है तुम ने कि मैं नज़्र करने को क्या ले गया था, तो तफ़्सील सुन लोथा ना'तों का इक हार, अश्कों के मोती, दुरूदों का गजरा, सलामों की डाली

धनी अपनी क़िस्मत का है तो वही है, दयार-ए-नबी जिस ने आँखों से देखामुक़द्दर है सच्चा मुक़द्दर उसी का, निगाह-ए-करम जिस पे आक़ा ने डाली

मैं उस आस्तान-ए-हरम का गदा हूँ, जहाँ सर झुकाते हैं शाहान-ए-'आलममुझे ताजदारों से कम मत समझना, मेरा सर है शायान-ए-ताज-ए-बिलाली

मैं तौसीफ़-ए-सरकार कर तो रहा हूँ, मगर अपनी औक़ात से बा-ख़बर हूँमैं सिर्फ़ एक अदना सना-ख़्वाँ हूँ उन का, कहाँ मैं कहाँ ना'त-ए-इक़बाल-ओ-हाली

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