नात लिरिक्स

Koi Guftugu Ho Lab Par Tera Naam Aa Gaya Hai

कोई गुफ़्तुगू हो लब पर तेरा नाम आ गया है

नात ख़्वान: क़ारी वहीद ज़फ़र क़ासमीशायर: अदीब रायपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कोई गुफ़्तुगू हो लब पर तेरा नाम आ गया हैतेरी मदह करते करते ये मक़ाम आ गया है

कोई गुफ़्तुगू हो लब पर तेरा नाम आ गया हैतेरा ज़िक्र करते करते ये मक़ाम आ गया है

दर-ए-मुस्तफ़ा का मंज़र, मेरी चश्म-ए-तर के अंदरकभी सुब्ह आ गया है, कभी शाम आ गया है

ये तलब थी अंबिया की रुख़-ए-मुस्तफ़ा को देखेंये नमाज़ का वसीला उन्हें काम आ गया है

जो सख़ी हैं दुनिया भर के, वो गदा हैं उन के दर केकि करम का उन के हाथों में निज़ाम आ गया है

दो जहाँ की ने'मतों से तेरे दर पे जो भी माँगामेरे दामन-ए-तलब में वो तमाम आ गया है

जिसे पी के शैख़ सा'दी बलग़ल-'उला पुकारेमेरे दस्त-ए-ना-तवाँ में वही जाम आ गया है

वो, अदीब ! जिस ने महशर में बपा किया है महशरवो कहेंगे आओ देखो वो ग़ुलाम आ गया है

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