नात लिरिक्स

Faslon Ko Takalluf Hai Hum Se Agar Hum Bhi Bebas Nahin Besahara Nahin

फ़ासलों को तकल्लुफ़ है हम से अगर हम भी बेबस नहीं बे-सहारा नहीं

नात ख़्वान: क़ारी वहीद ज़फ़र क़ासमीशायर: इक़बाल अज़ीमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़ासलों को तकल्लुफ़ है हम से अगर, हम भी बेबस नहीं बे-सहारा नहींख़ुद उन्ही को पुकारेंगे हम दूर से, रास्ते में अगर पाँव थक जाएँगे

हम मदीने में तन्हा निकल जाएँगे और गलियों में क़स्दन भटक जाएँगेहम वहाँ जा के वापस नहीं आएँगे, ढूँडते ढूँडते लोग थक जाएँगे

जैसे ही सब्ज़-गुंबद नज़र आएगा, बंदगी का क़रीना बदल जाएगासर झुकाने की फ़ुर्सत मिलेगी किसे, ख़ुद ही पलकों से सज्दे टपक जाएँगे

नाम-ए-आक़ा जहाँ भी लिया जाएगा, ज़िक्र उन का जहाँ भी किया जाएगानूर ही नूर सीनों में भर जाएगा, सारी महफ़िल में जल्वे लपक जाएँगे

ऐ मदीने के ज़ाइर ! ख़ुदा के लिए, दास्तान-ए-सफ़र मुझ को यूँ मत सुनाबात बढ़ जाएगी, दिल तड़प जाएगा, मेरे मोहतात आँसू छलक जाएँगे

उन की चश्म-ए-करम को है इस की ख़बर, किस मुसाफ़िर को है कितना शौक़-ए-सफ़रहम को, इक़बाल ! जब भी इजाज़त मिली, हम भी आक़ा के दरबार तक जाएँगे

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