नात लिरिक्स

Main Lab Kusha Nahin Hun Aur Mahw-e-Iltija Hun

मैं लब-कुशा नहीं हूँ और महव-ए-इल्तिजा हूँ

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: इक़बाल अज़ीमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बाब-ए-जिब्रील के पहलू में ज़रा धीरे सेफ़ख़्र कहते हुए जिब्रील को यूँ पाया गया

अपनी पलकों से दर-ए-यार पे दस्तक देनाऊँची आवाज़ हुई 'उम्र का सरमाया गया

मैं लब-कुशा नहीं हूँ और महव-ए-इल्तिजा हूँमैं महफ़िल-ए-हरम के आदाब जानता हूँ

ये रौशनी सी क्या है ? ख़ुश्बू कहाँ से आई ?शायद मैं चलते चलते रौज़े तक आ गया हूँ

तयबा के सब गदागर पहचानते हैं मुझ कोमुझ को ख़बर नहीं थी मैं इस-क़दर बड़ा हूँ

कोई तो आँख वाला गुज़रेगा इस तरफ़ सेतयबा के रास्ते में, मैं मुंतज़िर खड़ा हूँ

दूरी-ओ-हाज़िरी में इक बात मुश्तरक हैकुछ ख़्वाब देखता था, कुछ ख़्वाब देखता हूँ

उन को अगर न चाहूँ तो और किस को चाहूँजो हैं ख़ुदा के प्यारे, मैं उन को चाहता हूँ

ऐसा कोई मुसाफ़िर शायद कहीं न होगादेखे बग़ैर अपनी मंज़िल से आशना हूँ

इक़बाल ! मुझ को अब भी महसूस हो रहा हैरौज़े के सामने हूँ और ना'त पढ़ रहा हूँ

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