नात लिरिक्स

Un Ki Jaam-e-Jam Aankhen Sheesha-e-Badan Mera | Main Ghulam-e-Khwaja Hoon Hind Hai Watan Mera

उन की जाम-ए-जम आँखें शीशा-ए-बदन मेरा | मैं ग़ुलाम-ए-ख़्वाजा हूँ हिन्द है वतन मेरा

नात ख़्वान: क़ारी रिज़वान ख़ानशायर: नज़्मी मियाँ मारहरवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

उन की जाम-ए-जम आँखें शीशा-ए-बदन मेराउन की बंद मुट्ठी में सारा बाँकपन मेरा

उन की जाम-ए-जम आँखें, शीशा है बदन मेराउन की बंद मुट्ठी में सारा बाँकपन मेरा

अर्ज़-ए-गंग भी मेरी है, ख़ित्ता-ए-जमन मेरामैं ग़ुलाम-ए-ख़्वाजा हूँ, हिन्द है वतन मेरा

अर्ज़-ए-गंग भी मेरी, ख़ित्ता-ए-जमन मेरामैं ग़ुलाम-ए-ख़्वाजा हूँ, हिन्द है वतन मेरा

'आशिक़-ए-नबी हूँ मैं, वारिस-ए-'अली हूँ मैंमैला हो न पाएगा हश्र तक कफ़न मेरा

ना'त-ए-मुस्तफ़ा कहना, ना'त-ए-मुस्तफ़ा सुननामुझ को बख़्शवाएगा हाँ ! यही चलन मेरा

हश्र में निदा होगी, ये ग़ुलाम किस का है ?मुझ को देखें और कह दें, या शह-ए-ज़मन ! मेरा

'अर्श झूम झूम उठा, क़ुदसियों को वज्द आयाना'त-ए-मुस्तफ़ा में जब खुल गया दहन मेरा

ताक़-ए-दिल पे रखी है शम'अ 'इश्क़-ए-अहमद कीनूर की शु'आओं से भर गया है मन मेरा

आप चाहें हो जाएँ सारी मुश्किलें आसाँआप चाहें मिट जाए रंज और मेहन मेरा

लम्हा लम्हा याद उन की, साँस साँस ज़िक्र उन काहाँ ! यही तो रहता है आज कल जतन अपना

मैं ने सारे काम अपने मुस्तफ़ा को सौंपे हैंक्या बिगाड़ पाएगा दौर-ए-पुर-फ़ितन मेरा

वक़्फ़-ए-ज़िक्र-ए-अहमद हो ता-अबद क़लम, या रब !हश्र तक रहे जारी चश्मा-ए-सुख़न मेरा

'अज़मतें मेरे आगे सज्दा-रेज़ हो जाएँउन के दर से छू जाए, काश ! पैरहन मेरा

कब तलक दुहाई दूँ बेकसी के 'आलम मेंभाग्या कब सँवारेेंगे पाक-पंजतन मेरा

हश्र में तराज़ू पर तोले जाएँगे आ'मालकाम आ ही जाएगा ना'त का ये फ़न मेरा

'अर्श से परे जा कर मुस्तफ़ा ने बतलायाये ज़मीं भी मेरी है और है गगन मेरा

गुलशन-ए-मदीना से, नज़्मी ! मुझ को निस्बत हैएक एक कली मेरी, गुल मेरा, चमन मेरा

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