नात लिरिक्स

Kabe Ke Dar Ke Samne Mangi Hai Ye Dua Faqat

काबे के दर के सामने माँगी है ये दुआ फ़क़त

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: नज़्मी मियाँ मारहरवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

का'बे के दर के सामने माँगी है ये दु'आ फ़क़तहाथों में हश्र तक रहे दामन-ए-मुस्तफ़ा फ़क़त

नज़'अ के वक़्त जब मेरी साँसों में इंतिशार होमेरी नज़र के सामने गुंबद हो वो हरा फ़क़त

तयबा की सैर को चलें, क़दमों में उन के जान देंदफ़्न हों उन के शहर में, है यही इल्तिजा फ़क़त

दुनिया की सारी ने'मतें मेरी नज़र में हेच होंरखने को सर पे गर मिलें ना'लैन-ए-मुस्तफ़ा फ़क़त

अपने करम से, ऐ ख़ुदा ! 'इश्क़-ए-रसूल कर 'अताआख़िरी दम ज़बाँ पे हो सल्ले-'अला सदा फ़क़त

यूँ तो हर इक नबी वली रब के हुज़ूर हैं शफ़ी'शाफ़े'-ए-रोज़-ए-हश्र का हम को है आसरा फ़क़त

मुन्कर-नकीर क़ब्र में हम से सवाल जब करेंऐसे में विर्द हम रखें आप के नाम का फ़क़त

ना'त-ए-रसूल-ए-पाक है नज़्मी का मक़्सद-ए-हयातआख़िरी दम लबों पे हो सरकार की सना फ़क़त

ना'त-ए-रसूल-ए-पाक है नज़्मी का मक़्सद-ए-हयातक़ब्र में भी लबों पे हो सरकार की सना फ़क़त

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