नात लिरिक्स

Likh Raha Hoon Naat-e-Sarwar Sabz Gumbad Dekh Kar

लिख रहा हूँ नात-ए-सरवर सब्ज़ गुंबद देख कर

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

लिख रहा हूँ ना'त-ए-सरवर सब्ज़-गुंबद देख करकैफ़ तारी है क़लम पर सब्ज़-गुंबद देख कर

है मुक़द्दर यावरी पर सब्ज़-गुंबद देख करफिर न क्यूँ झूमे सना-गर सब्ज़-गुंबद देख कर

मस्जिद-ए-नबवी पे पहुँचे, मरहबा सल्ले-'अलाहो गया जारी ज़बाँ पर सब्ज़-गुंबद देख कर

आप से बस आप ही को माँगता है, या नबी !आप का अदना गदागर सब्ज़-गुंबद देख कर

जूँही मैं पहुँचा मदीने की गली में बे-क़रारआँख मेरी हो गई तर सब्ज़-गुंबद देख कर

रूह को तस्कीन, जान-ए-मुज़्तरिब को चैन हैदिल को भी राहत मुयस्सर सब्ज़-गुंबद देख कर

उन के मँगते, उन के साहिल दो-जहाँ की ने'मतेंमाँगते हैं हाथ उठा कर सब्ज़-गुंबद देख कर

लंदन-ओ-पैरिस का 'आशिक़ भी यक़ीनन मरहबा !बोल उठेगा रूह-परवर सब्ज़-गुंबद देख कर

धूप रोज़ाना मदीना झूम कर है चूमतीऔर लिपट जाती है आ कर सब्ज़-गुंबद देख कर

चूम लेता है मदीना रोज़ आ कर आफ़ताबफिर लिपट जाता है आ कर सब्ज़-गुंबद देख कर

टूट जाए दम मदीने में मेरा, या रब ! बक़ी'अकाश ! हो जाए मुयस्सर सब्ज़-गुंबद देख कर

जब जुदाई की घड़ी आती है तो कोह-ए-अलमटूट पड़ता है दिलों पर सब्ज़-गुंबद देख कर

आप की गलियों के कुत्ते मुझ से तो अच्छे रहेहै सुकूँ उन को मुयस्सर सब्ज़-गुंबद देख कर

वक़्त-ए-रुख़्सत ख़ून उगलते थे मेरे क़ल्ब-ओ-जिगरआँख रो पड़ती थी अक्सर सब्ज़-गुंबद देख कर

मेरे मुर्शिद ने गुज़ारे हैं मदीने में बरसउन की रहमत से सतत्तर सब्ज़-गुंबद देख कर

या रसूलल्लाह ! मुर्शिद पर करम हों बेशुमारसोए हैं क़दमों में आ कर सब्ज़-गुंबद देख कर

आह, ऐ 'अत्तार ! इतना भी न तुझ से हो सकाजान कर देता निछावर सब्ज़-गुंबद देख कर

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