नात लिरिक्स

Kyun Na Kate Mere Sarkar Ke Chakkar Badal

क्यूँ न काटे मेरे सरकार के चक्कर बादल

नात ख़्वान: ज़ैन-उल-आबिदीन कानपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क्यूँ न काटे मेरे सरकार के चक्कर बादलइक ज़माने से है शैदा-ए-पयम्बर बादल

कैसे चलना है फ़लक पर ये है मर्ज़ी उस कीउन के दरबार में चलता है सँभल कर बादल

धूप सरकार पे आए भी तो कैसे आएनीचे सरकार चलें, साथ में ऊपर बादल

बस इसी आस में बैठा हूँ नहाने के लिएशहर-ए-तयबा से अभी आएगा हो कर बादल

आज ना'त-ए-शह-ए-कौनैन की महफ़िल है जहाँआज बरसेगा वहाँ देखना जम कर बादल

जब भी तौसीफ़-ए-पयम्बर में ज़बाँ खुलती हैदाद देता है मुझे ख़ूब गरज कर बादल

रब त'आला की क़सम, हुक्म जो दे देते हुसैनआता ख़ैमे में लिए ज़मज़म-ओ-कौसर बादल

कर्बला तेरी ज़मीं अब नहीं बंजर होगीतुझ पे इक साथ ही बरसे हैं बहत्तर बादल

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