नात लिरिक्स

Jab Karbala Hussain Ka Lashkar Nikal Gaya

जब कर्बला हुसैन का लश्कर निकल गया

नात ख़्वान: ज़ैन-उल-आबिदीन कानपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जब कर्बला हुसैन का लश्कर निकल गयाजब कर्बला हुसैन का असग़र निकल गयाइस्लाम की हयात का नक़्शा बदल गया

ज़िक्र-ए-नबी से ज़ीस्त ने पाई है रौशनीनाद-ए-'अली से हर बड़ा तूफ़ान टल गया

बोला यज़ीद अब तो मेरी हार हो गईहुर्र लश्कर-ए-हुसैन की जानिब फिसल गया

ऐसी नमाज़ जो बनी इस बात की गवाहसब्र-ए-हुसैन ज़ुल्म को ज़िंदा निगल गया

तुम तीर मार कर भी गिरे, उठ नहीं सकेअसग़र तो तीर खा के भी फ़ौरन सँभल गया

बच्चों को पलते देखा है माओं की गोद मेंज़हरा तुम्हारी गोद में इस्लाम पल गया

ज़ैनब तुम्हारे ख़ुत्बे में इक ऐसी आग थीशैतान मुल्क-ए-शाम का पल भर में जल गया

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