नात लिरिक्स

Dariya Hussain Ka Hai Samandar Hussain Ka

दरिया हुसैन का है समंदर हुसैन का

नात ख़्वान: ज़ैन-उल-आबिदीन कानपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दरिया हुसैन का है, समंदर हुसैन काप्यासों के वास्ते है ये लंगर हुसैन का

है आरज़ू वहाँ भी मिले दर हुसैन काजन्नत में बन के जाऊँ मैं नौकर हुसैन का

सूरज ने अपने सर को अदब से झुका लियानेज़े पे जब बलंद हुआ सर हुसैन का

सब जानते हैं कितने बहादर हुसैन हैंमौला 'अली के हाथ का ख़ंजर हुसैन हैं

राह-ए-ख़ुदा में घर दिया और सर भी दे दियाअब सोचिए कि कितने दिलावर हुसैन हैं

कोई यज़ीद कैसे भला सर उठाएगामौजूद रब के फ़ज़्ल से घर घर हुसैन हैं

चौदह सौ साल पहले गया था जो क़ाफ़िलाउस क़ाफ़िले के आज भी रहबर हुसैन हैं

ज़हरा के घर में लाल-ओ-जवाहिर हैं बेशुमारजो सब से क़ीमती है वो गौहर हुसैन हैं

उस का भी हश्र होगा यज़ीदों के साथ साथजिस ने कहा कि मेरे बराबर हुसैन हैं

इब्न-ए-ज़ियाद का तो वहीं दम निकल गयाहुर्र ने कहा जो मेरा मुक़द्दर हुसैन हैं

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