नात लिरिक्स

Kya Shan Pai Allahu Akbar | Siddiq-e-Akbar Siddiq-e-Akbar

क्या शान पाई अल्लाहु अकबर | सिद्दीक़-ए-अकबर सिद्दीक़-ए-अकबर

नात ख़्वान: राओ ब्रदर्सशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क्या शान पाई, अल्लाहु अकबर !सिद्दीक़-ए-अकबर ! सिद्दीक़-ए-अकबर !सरकार के हो तुम ख़ास दिलबरसिद्दीक़-ए-अकबर ! सिद्दीक़-ए-अकबर !

तुम्ही तो ठहरे पहले ख़लीफ़ाहर इक सहाबी क़ाइल तुम्हाराफ़ारूक़ हो या 'उस्मान-ओ-हैदरसिद्दीक़-ए-अकबर ! सिद्दीक़-ए-अकबर !

हर वक़्त आक़ा के साथ रहतेसफ़र-ओ-हज़र में, बाज़ार-ओ-घर मेंअब भी लहद में उन के बराबरसिद्दीक़-ए-अकबर ! सिद्दीक़-ए-अकबर !

कैसी है रौनक़ ! 'उस्माँ, 'उमर भीदरबार में हैं हाज़िर 'अली भीकरते हैं बै'अत शब्बीर-ओ-शब्बरसिद्दीक़-ए-अकबर ! सिद्दीक़-ए-अकबर !

असहाब के गुन गाते रहेंगे'इज़्ज़त पे पहरा देते रहेंगेहम भी, उजागर ! ख़ादिम हैं नौकरसिद्दीक़-ए-अकबर ! सिद्दीक़-ए-अकबर !

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