नात लिरिक्स

Khilaf Hoga Zamana To Kuchh Nahin Hoga

ख़िलाफ़ होगा ज़माना तो कुछ नहीं होगा

नात ख़्वान: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्समशायर: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्समउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़िलाफ़ होगा ज़माना तो कुछ नहीं होगामैं हूँ तुम्हारा दीवाना तो कुछ नहीं होगा

मिटाना चाहे भी दुनिया तो कुछ नहीं होगाहमारे साथ हैं आक़ा तो कुछ नहीं होगा

निकलता हूँ मैं सफ़र पर इसी यक़ीन के साथन चाहेगा मेरा मौला तो कुछ नहीं होगा

सुना है रूह निकलने में जिस्म काँपता हैहो सामने तेरा जल्वा तो कुछ नहीं होगा

हज़ारों मुश्किलें आती हैं आएँ क्या ग़म हैहै साथ नाम 'अली का तो कुछ नहीं होगा

ये बात सच है कि, इस्लाम ! तेरे दामन मेंन हो हुसैन का सज्दा तो कुछ नहीं होगा

किसी की गंदी नज़र आप को न देखेगीहो सर पे चादर-ए-ज़हरा तो कुछ नहीं होगा

वहाबियत की नुहूसत का कोई ख़ौफ़ नहींबरेली वाला है अपना तो कुछ नहीं होगा

मिज़ाज में भी सुल्ह-ए-कुल्लियत न आएगीहै पीर ताज-ए-शरि'आ तो कुछ नहीं होगा

ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्सम के हक़ में ना'त आईमैं सोचता था कि मेरा तो कुछ नहीं होगा

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