नात लिरिक्स

Khak-e-Karbal Par Ali Ka Ladla Sajde Mein Hai

ख़ाक-ए-कर्बल पर अली का लाडला सज्दे में है

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ाक-ए-कर्बल पर 'अली का लाडला सज्दे में हैनौजवानान-ए-जिनाँ का बादशाह सज्दे में है

जो कभी था आप के काँधे पे बैठा, या नबी !कर्बला में आप का वो लाडला सज्दे में है

जिस के बोसे लेते थे सुल्तान-ए-'आलम बारहावो सर-ए-इब्न-ए-'अली तन से जुदा सज्दे में है

ज़िंदगी दे कर हबीब-ए-किब्रिया के दीन कोसर कटा कर फ़ातेह-ए-कर्ब-ओ-बला सज्दे में है

जिस का, ऐ शौक़-ए-फ़रीदी ! दीन पर एहसान हैहाँ वही चश्मान-ए-ज़हरा की ज़िया सज्दे में है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।