नात लिरिक्स

Karam Ho Karam Tajdar-e-Madina

करम हो करम ताजदार-ए-मदीना

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ गुंबद-ए-ख़ज़रा के मकीं ! मेरी मदद करया फिर ये बता कौन मेरा तेरे सिवा है

करम हो करम, ताजदार-ए-मदीना !करम चाहते हैं करम के भिकारीशहंशाह-ए-कौनैन तयबा के वाली !मैं क़ुर्बान तुम पर, मेरी जान वारी

हबीब-ए-ख़ुदा साक़ी-ए-हौज़-ए-कौसर !ख़ुदारा ग़ुलामों पे चश्म-ए-करम होहमें आज दे दो नवासों का सदक़ाकि मुद्दत से ख़ाली है झोली हमारी

मेरा दिल भी लब्बैक बोले किसी दिनकभी सब्ज़ गुंबद को देखूँ मैं जा करमुझे अपने रौज़े पे बुलवा लो, आक़ा !हैं सारे जहाँ पर निगाहें तुम्हारी

मुक़द्दर जो जागे तो इस तरह जागेमदीने मैं जाऊँ तो इस तरह जाऊँदुरूदों की सौग़ात हो पास मेरेमुहम्मद मुहम्मद लबों पर हो जारी

है क़ुरआन सारी किताबों से अफ़ज़लख़लिश ने पढ़ा है ये क़ुरआँ में, आक़ा !सजाया गया सिदरतुल-मुंतहा कोफ़लक पर जो पहुँची सवारी तुम्हारी

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।