नात लिरिक्स

Kahan Ho Ya Rasoolallah Kahan Ho

कहाँ हो या रसूलल्लाह कहाँ हो

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीशायर: मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कहाँ हो, या रसूलल्लाह ! कहाँ होमेरी आँखों से क्यूँ ऐसे निहाँ हो

गदा बन कर मैं ढूँडूँ तुम को दर दरमेरे आक़ा ! मुझे छोड़ा है किस पर

अगर मैं ख़्वाब में दीदार पाऊँलिपट क़दमों से बस क़ुर्बान जाऊँ

तमन्ना है तुम्हारे देखने कीनहीं है इस से बढ़ कर कोई नेकी

बसो दिल में, समा जाओ नज़र मेंज़रा आ जाओ इस वीराना-घर में

बना दो मेरे सीने को मदीनानिकालो बहर-ए-ग़म से ये सफ़ीना

मेरी बिगड़ी हुई हालत बना दोमेरी सोई हुई क़िस्मत जगा दो

तुम्हारे सैकड़ों हम से गदा हैंहमारे आप ही इक आसरा हैं

खिलाईं ने'मतें मुझ बे-हुनर कोदिया आराम मुझ गंदे बशर को

नहीं है साथ मेरे कोई तोशाकठिन मंज़िल, तुम्हारा है भरोसा

खुलें जब रोज़-ए-महशर मेरे दफ़्तररहे पर्दा मेरा, महबूब-ए-दावर !

मैं बे-ज़र, बे-हुनर, बे-पर हूँ, सालिक !मगर उन का हूँ वो हैं मेरे मालिक

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।