नात लिरिक्स

Jo Guzri Hai Wo Kis Kis Ko Batayen Ya Rasoolallah

जो गुज़री है वो किस किस को बताएँ या रसूलल्लाह

नात ख़्वान: ख़ालिद हसनैन ख़ालिदशायर: रियाज़ हुसैन चौधरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो गुज़री है वो किस किस को बताएँ, या रसूलल्लाह !किसे हाल-ए-दिल-ए-मुज़्तर सुनाएँ, या रसूलल्लाह !

ये हसरत है कि तस्वीर-ए-अदब बन कर मवाजा मेंचराग़-ए-दीदा-ए-पुर-नम जलाएँ, या रसूलल्लाह !

पड़ा हूँ रख के ज़ंजीर-ए-ग़ुलामी आप के दर परसजाई हैं लबों पर इल्तिजाएँ, या रसूलल्लाह !

बदन पर अन-गिनत ज़ख़्मों के अब तक हैं निशाँ बाक़ीइन्हें दामान-ए-रहमत में छुपाएँ, या रसूलल्लाह !

मेरे आँसू भी ले जाएँ, मेरी आँखें भी ले जाएँमदीने की तरफ़ जाती हवाएँ, या रसूलल्लाह !

मदीने में खड़ा है एक मुजरिम हथकड़ी पहनेइसे भी 'उम्र भर की हों सज़ाएँ, या रसूलल्लाह !

निकल कर क़ब्र-ए-अनवर से दिलासा दें ग़ुलामों कोसजी हैं हर क़दम पर कर्बलाएँ, या रसूलल्लाह !

अदब की ओढ़नी ले कर दर-ए-अक़दस पे आ जाएँकहाँ जंगल में भटकेंगी सदाएँ, या रसूलल्लाह !

सू-ए-अफ़लाक उड़ने से ज़रा पहले मवाजा परदुरूद-ए-पाक पढ़ती हैं दु'आएँ, या रसूलल्लाह !

नहीं पानी का क़तरा आब-ख़ोरों में कोई बाक़ीकरम की भेज दें काली घटाएँ, या रसूलल्लाह !

खड़ी रहती हैं अपने घर के दरवाज़े में पहरों तककिधर जाएँ जवाँ बेटों की माएँ, या रसूलल्लाह !

तसव्वुर में जवार-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा में सब बच्चेघरौंदे आरज़ूओं के बनाएँ, या रसूलल्लाह !

कनीज़ें अपने अश्कों की ज़बाँ में 'अर्ज़ करती हैंहमें भी अपनी चौखट पर बुलाएँ, या रसूलल्लाह !

र'ऊनत के झरोके में खड़ी हैं तान कर सीनाअभी तक अन-गिनत झूटी अनाएँ, या रसूलल्लाह !

उतारें पैरहन जुर्म-ए-ज़'ईफ़ी का ग़ुलाम आख़िरतमाशा क्या ज़माने को दिखाएँ, या रसूलल्लाह !

दुहाई दे रही हैं आप के इस्म-ए-गिरामी कीकई सदियों से ज़ख़्मी फ़ाख़्ताएँ, या रसूलल्लाह !

ग़ुलामों के मुक़द्दर में सुकून-ए-दिल की दौलत देंसफ़-ए-मातम अँधेरे भी बिछाएँ, या रसूलल्लाह !

शब-ए-मीलाद बच्चे शौक़ से घर के मुंडेरों परअदब से जल रही आँखें बिछाएँ, या रसूलल्लाह !

रियाज़-ए-बे-नवा की इल्तिजा है अपने बर्दे कोबड़ी शफ़क़त से सीने से लगाएँ, या रसूलल्लाह !

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