नात लिरिक्स

Jo Bhi Dushman Hai Mere Raza Ka Jal Raha Tha Jala Hai Jalega

जो भी दुश्मन है मेरे रज़ा का जल रहा था जला है जलेगा

नात ख़्वान: असद इक़बाल कलकत्तवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जो भी दुश्मन है मेरे रज़ा का, जल रहा था जला है जलेगामस्लक-ए-आ'ला-हज़रत का ना'रा लग रहा है हमेशा लगेगा

बुग़्ज़-ओ-कीना का चश्मा लगा कर, नज़्दियों ने लिखा जो छुपा करआम हज़रत से तो बच गया है, आ'ला हज़रत से कैसे बचेगा ?

बा'द-अज़ाँ जिस की दुनिया में शोहरत, है रज़ा का सलाम-ए-मोहब्बतमरहबा ! मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत झूम कर उन का 'आशिक़ पढ़ेगा

वो रज़ा का घराना है, प्यारे ! 'इल्म का कारख़ाना है, प्यारे !उन के टकसाल में जो ढलेगा, 'इल्म का इक हिमाला बनेगा

मुस्तफ़ा की 'इनायत से, प्यारे ! ग़ौस-ए-आ'ज़म की बरकत से, प्यारे !अहल-ए-सुन्नत के बाज़ार में अब आ'ला हज़रत का सिक्का चलेगा

'इश्क़-ए-अहमद का मफ़्हूम क्या है ? नज़्दियो ! तुम को मा'लूम क्या है ?आ'ला हज़रत के पैकर में देखो, 'इश्क़-ए-अहमद का जल्वा मिलेगा

दूध माँगोगे हम खीर देंगे, वर्ना बाग़ी को हम चीर देंगेसुन्नियों से न ले कोई पंगा, वर्ना पंगा ये महँगा पड़ेगा

ग़ौस-ओ-ख़्वाजा की बेशक़ 'अता है, हिन्द में एक अहमद रज़ा हैअहल-ए-सुन्नत का जो मुक़्तदा है, वो बरेली में तुम को मिलेगा

हाथ मलते रहें मलने वाले, लाख जलते रहें जलने वालेग़ौस-ओ-ख़्वाजा के लुत्फ़-ओ-करम से आ'ला हज़रत का डंका बजेगा

वो रज़ा के चमन का सितारा, अहल-ए-सुन्नत के दिल का उजालाअख़्तर-ए-क़ादरी सब के दिल पर, राज करता है करता रहेगा

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