नात लिरिक्स

Is Sadi Mein Peer Aisa Dhoondte Rah Jaaoge

इस सदी में पीर ऐसा ढूँडते रह जाओगे

नात ख़्वान: अब्दुल हफ़ीज़ क़ादरी उदयपुरीशायर: वसीम बेख़ुदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इस सदी में पीर ऐसा ढूँडते रह जाओगेसानी-ए-ताजु-श्शरी'आ ढूँडते रह जाओगे

सारी दुनिया में है शोहरत उस रज़ा के लाल कीहर तरफ़ वो ताज वाला ढूँडते रह जाओगे

छोड़ कर अख़्तर रज़ा को इस जहाँ की भीड़ मेंरह-नुमाई करने वाला ढूँडते रह जाओगे

वारिस-ए-'इल्म-ए-रज़ा हैं, नाइब-ए-आल-ए-नबी'इल्म-ओ-हिकमत का ख़ज़ाना ढूँडते रह जाओगे

इन के दामन को पकड़ लो आज, सुल्ह-ए-कुल्लियो !हश्र में इन का सहारा ढूँडते रह जाओगे

आज, बेख़ुद ! थाम लो तुम दामन-ए-अख़्तर-रज़ावर्ना महशर में वसीला ढूँडते रह जाओगे

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