नात लिरिक्स

Is Baras Hajj Na Hum Kar Sake Hain | Aah Mehroom Hajj Se Hue Hain

इस बरस हज न हम कर सके हैं | आह महरूम हज से हुए हैं

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इस बरस हज न हम कर सके हैंआह ! महरूम हज से हुए हैंअपनी क़िस्मत पे हम रो रहे हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

इस बरस हज न हम कर सके हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

याद 'अर्फ़ात की आ रही हैवो खड़े हो के तुझ को मनानासब ख़यालों में नक़्श आ रहे हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

इस बरस हज न हम कर सके हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

उन से पूछो जो हज पर चले थेजम'अ ज़ाद-ए-सफ़र कर रहे थेनज़्र हालात वो हो गए हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

इस बरस हज न हम कर सके हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

साल भर हज के वो मुंतज़िर थेकितनी मुश्किल से दिन कट रहे थेजीते-जी अब तो वो मर गए हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

इस बरस हज न हम कर सके हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

आक़ा ! किस से कहूँ अपनी बिपताकौन ज़ख़्मों पे मरहम रखेगातेरे दर पर भी न आ सके हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

इस बरस हज न हम कर सके हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

बख़्त ऐसा उजागर 'अता होहर बरस हज का मौसम लिखा होहाल-ए-दिल कह के हम रो रहे हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

इस बरस हज न हम कर सके हैंआह ! महरूम हज से हुए हैं

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।