नात लिरिक्स

Hum Ko Bulana Ya Rasoolallah | Kabhi To Sabz Gumbad Ka Ujala Hum Bhi Dekhenge

हम को बुलाना या रसूलल्लाह | कभी तो सब्ज़ गुंबद का उजाला हम भी देखेंगे

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

कभी तो सब्ज़-गुंबद का उजाला हम भी देखेंगेहमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !

धड़क उट्ठेगा ये दिल या धड़कना भूल जाएगादिल-ए-बिस्मिल का उस दर पर तमाशा हम भी देखेंगे

हमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

कभी तो सब्ज़-गुंबद का उजाला हम भी देखेंगेहमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

अदब से हाथ बाँधे उन के रौज़े पर खड़े होंगेसुनहरी जालियों का यूँ नज़ारा हम भी देखेंगे

हमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

कभी तो सब्ज़-गुंबद का उजाला हम भी देखेंगेहमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

दर-ए-दौलत से लौटाया नहीं जाता कोई ख़ालीवहाँ ख़ैरात का बटना, ख़ुदाया ! हम भी देखेंगे

हमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

कभी तो सब्ज़-गुंबद का उजाला हम भी देखेंगेहमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

बरसती गुंबद-ए-ख़ज़रा से टकराती हुई बूँदेंवहाँ पर शान से बारिश बरसना हम भी देखेंगे

हमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

कभी तो सब्ज़-गुंबद का उजाला हम भी देखेंगेहमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

गुज़ारे रात-दिन अपने इसी उम्मीद पर हम नेकिसी दिन तो जमाल-ए-रू-ए-ज़ेबा हम भी देखेंगे

हमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

कभी तो सब्ज़-गुंबद का उजाला हम भी देखेंगेहमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

दम-ए-रुख़्सत क़दम मन भर के हैं महसूस करते हैंकिसे है जा के लौट आने का यारा हम भी देखेंगे !

हमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

कभी तो सब्ज़-गुंबद का उजाला हम भी देखेंगेहमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

पहुँच जाऐंगे जिस दिन, ऐ उजागर ! उन के क़दमों मेंकिसे कहते हैं जन्नत का नज़ारा हम भी देखेंगे !

हमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

कभी तो सब्ज़-गुंबद का उजाला हम भी देखेंगेहमें बुलवाएँगे आक़ा, मदीना हम भी देखेंगे

हम को बुलाना, या रसूलल्लाह !हम को बुलाना, या हबीबल्लाह !

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