नात लिरिक्स

Hajj Pe Hum Ko Bhi Bula Le Aye Mere Parwardigar

हज पे हम को भी बुला ले ऐ मेरे परवरदिगार

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !

लब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैक

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लका लब्बैक

हज पे हम को भी बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दयार

हज पे हम को भी बुला

ये शरफ़ कर दे 'अता मुझ को तुफ़ैल-ए-मुस्तफ़ाख़ाना-ए-का'बा के मैं चक्कर लगाऊँ सात बार

हज पे हम को भी बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दयार

हज पे हम को भी बुला

लब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैक

थाम कर के ख़ाना-ए-का'बा की चादर, या ख़ुदा !जुर्मों पर कर के नदामत रोऊँ मैं ज़ार-ओ-क़तार

हज पे हम को भी बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दयार

हज पे हम को भी बुला

लब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैक

मैं सरापा जुर्म-ओ-'इस्याँ में घिरा हूँ बख़्श दे'आसियों को बख़्शना है, या ख़ुदा ! तेरा शि'आर

हज पे हम को भी बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दयार

हज पे हम को भी बुला

लब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैक

वो मदीना जो कौनैन का ताज हैजिस का दीदार मोमिन की मे'राज हैज़िंदगी में ख़ुदा हर मुसलमान कोवो मदीना दिखा दे तो क्या बात है

उन के दर के ज़र्रे ज़र्रे को मैं अपने क़ल्ब सेऔर माथे से लगाऊँ शाह के दर का ग़ुबार

हज पे हम को भी बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दयार

हज पे हम को भी बुला

लब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैक

है यही हसरत कि जब जाऊँ दर-ए-वाला पे मैंजान भी क़ुर्बान कर दूँ उन पे मैं परवाना-वार

हज पे हम को भी बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दयार

हज पे हम को भी बुला

लब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैक

हैसियत कुछ भी नहीं मेरी, क़सम रब की ! मगरउन की मिदहत के ही सदक़े जग में है मेरा वक़ार

हज पे हम को भी बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दयार

हज पे हम को भी बुला

लब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैक

इल्तिजा शौक़-ए-फ़रीदी की है, रब्बुल-'आलमीन !मौत से पहले बुला ले अपने दर पे एक बार

हज पे हम को भी बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दयार

हज पे हम को भी बुला

लब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्मलब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैक लब्बैक

लब्बैक अल्लाहुम्म लब्बैकला शरीका लका लब्बैकइन्नल-ह़म्दा व-न्नि'अमता लका वल्-मुल्कला शरीका लका लब्बैक

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