नात लिरिक्स

Hajj Pe Bhi Hum Ko Bula Le Aye Mere Parwardigar

हज पे भी हम को बुला ले ऐ मेरे परवरदिगार

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या रब्बी ! या रब्बी ! या रब्बी ! या रब्बी !

हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !ता-कि हम भी देख लें इन आँखों से तेरा दियार

अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !

वो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगावो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगा

ये शरफ़ कर दे 'अता मुझ को तुफ़ैल-ए-मुस्तफ़ाख़ाना-ए-का'बा के मैं चक्कर लगाऊँ सात बार

हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !

अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !

थाम कर के ख़ाना-ए-का'बा की चादर, या ख़ुदा !जुर्मों पे कर के नदामत रोऊँ मैं ज़ार-ओ-क़तार

का'बा दिखा दे, मौला !ज़मज़म पिला दे, मौला !

संग-ए-अस्वद का लूँ बोसा, आब-ए-ज़मज़म भी पिऊँये तमन्ना कर दे पूरी, ऐ ख़ुदा-ए-किर्दगार !

हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !

वो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगावो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगा

जब चलें हुज्जाज मुज़्दलिफ़ा-ओ-'अर्फ़ात-ओ-मिनाया ख़ुदा ! उन हाजियों में मुझ को भी करना शुमार

हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !

अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !

मैं सरापा जुर्म-ओ-'इस्याँ में घिरा हूँ, बख़्श दे'आसियों को बख़्शना है, या ख़ुदा ! तेरा शि'आर

हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !

वो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगावो दिन भी तो आएगा, मैं हज पर जाऊँगा

हसन ! हज कर लिया, का'बे से आँखों ने ज़िया पाईचलो देखें वो बस्ती जिस का रस्ता दिल के अंदर है

मदीना आने वाला है, मदीना आने वाला हैमदीना आने वाला है, मदीना आने वाला है

जाऊँ मैं भी बा-अदब हो कर के शहर-ए-मुस्तफ़ाऔर देखूँ रश्क-ए-जन्नत शाह-ए-बतहा का मज़ार

उन के दर के ज़र्रे ज़र्रे को मैं अपने क़ल्ब सेऔर माथे से लगाऊँ शाह के दर का ग़ुबार

मदीना आने वाला है, मदीना आने वाला हैमदीना आने वाला है, मदीना आने वाला है

है यही हसरत कि जब जाऊँ दर-ए-वाला पे मैंजान भी क़ुर्बान कर दूँ उन पे मैं परवाना-वार

हैसियत कुछ भी नहीं मेरी क़सम रब की मगरउन की मिदहत के ही सदक़े जग में है मेरा वक़ार

मदीना आने वाला है, मदीना आने वाला हैमदीना आने वाला है, मदीना आने वाला है

इल्तिजा शौक़-ए-फ़रीदी की है, रब्ब-उल-'आलमीन !मौत से पहले बुला ले अपने दर पर एक बार

हज पे भी हम को बुला ले, ऐ मेरे परवरदिगार !

अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।