नात लिरिक्स

Gham-e-Duniya Se Kyun Ghabra Raha Hai

ग़म-ए-दुनिया से क्यूँ घबरा रहा है

नात ख़्वान: असद रज़ा अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़म-ए-दुनिया से क्यूँ घबरा रहा हैतेरा हामी शह-ए-हर-दो-सरा है

ख़ुदा की ने'मतों के हैं वो क़ासिमज़माना उन का सदक़ा खा रहा है

जहाँ में बट रहा है उन का सदक़ाये ख़्वान-ए-जूद उन का ही बिछा है

ज़मीन-ओ-आसमाँ और ख़ुल्द में भीख़ुदा की हम्द और उन की सना है

ख़ुदा दिखलाए सूरत मुस्तफ़ा कीहमारे दर्द-ओ-दुख की ये दवा है

शफ़ा'अत की लगी है आस उन सेयही तो 'आसियों का आसरा है

बहक सकते नहीं रब के करम सेहमारा पेशवा अहमद रज़ा है

नहीं कुछ काम, ऐ बुरहाँ ! किसी सेदर-ए-सरकार ही से वास्ता है

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