नात लिरिक्स

Faiz Tumhara Sath Rahe | Nazr-e-Karam Ho Jilani

फ़ैज़ तुम्हारा साथ रहे | नज़र-ए-करम हो जीलानी

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रहबर दिलबर रूहानी ! ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी !रहबर दिलबर रूहानी ! ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी !

या ग़ौस ! अल-मदद, या ग़ौस ! अल-मदद

फ़ैज़ तुम्हारा साथ रहे, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !हर-जा मेरी बात बने, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

क़ादरी निस्बत है मुझ को, जाम-ए-विलायत दो मुझ कोरंग तुम्हारा चढ़ता रहे, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

फ़ैज़ तुम्हारा साथ रहे, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !हर-जा मेरी बात बने, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

तंग हुए रस्ते मेरे, दर्द-ओ-अलम के हैं डेरेतेरी चौखट पर आए, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

फ़ैज़ तुम्हारा साथ रहे, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !हर-जा मेरी बात बने, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

शेर के जबड़े चीर के भी ले आओ मुरीद को तुमगर तुम से फ़रियाद करे, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

फ़ैज़ तुम्हारा साथ रहे, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !हर-जा मेरी बात बने, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

सामने जाबिर हाकिम हो, हक़ कहने की 'आदत होऔर लहज़ा बेबाक मिले, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

फ़ैज़ तुम्हारा साथ रहे, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !हर-जा मेरी बात बने, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

उलझन कितनी मुश्किल हो, ना-मुम्किन भी मुम्किन होतेरी नज़र से काम बने, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

फ़ैज़ तुम्हारा साथ रहे, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !हर-जा मेरी बात बने, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

क़ाल, उजागर ! क्या कहना, हाल तुम्हारा सब से जुदागर्दन सब वलियों की झुके, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

फ़ैज़ तुम्हारा साथ रहे, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !हर-जा मेरी बात बने, नज़र-ए-करम हो, जीलानी !

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