नात लिरिक्स

Ek Roz Hoga Jana Sarkar Ki Gali Mein

इक रोज़ होगा जाना सरकार की गली में

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: अब्दुल सत्तार नियाज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इक रोज़ होगा जाना सरकार की गली मेंहोगा कभी ठिकाना सरकार की गली में

आँखे तो देखने को पहले ही मुज़्तरिब थींदिल भी हुआ रवाना सरकार की गली में

गो पास कुछ नहीं है लेकिन ये देख लेगाइक दिन मुझे ज़माना सरकार की गली में

कभी हो हसीं तसव्वुर, कभी ख़ुद मैं जाऊँ चल कररहे यूँही आना जाना सरकार की गली में

हैं कहीं ख़िज़ाँ के पहरे, कहीं दो घड़ी बहारेंमौसम सदा सुहाना सरकार की गली में !

दिल में नबी की यादें, लब पर नबी की ना'तेंजाना तो ऐसे जाना सरकार की गली में

यही रस्म-ए-'आशिक़ी है, यही जान-ए-बंदगी हैसर रख के न उठाना सरकार की गली में

समझेंगे हम, नियाज़ी ! उन की करम-नवाज़ीजिस दिन हुए रवाना सरकार की गली में

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