नात लिरिक्स

Aankhon Mein Bas Gaya Hai Madina Huzoor Ka

आँखों में बस गया है मदीना हुज़ूर का

नात ख़्वान: रईस अनीस साबरीशायर: अब्दुल सत्तार नियाज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

आँखों में बस गया है मदीना हुज़ूर काबेकस का आसरा है मदीना हुज़ूर का

फिर जा रहे हैं अहल-ए-मोहब्बत के क़ाफ़िलेफिर याद आ रहा है मदीना हुज़ूर का

तस्कीन-ए-जाँ है, राहत-ए-दिल, वज्ह-ए-इंबिसातहर दर्द की दवा है मदीना हुज़ूर का

नबियों में जैसे अफ़ज़ल-ओ-आ'ला हैं मुस्तफ़ाशहरों में बादशा है मदीना हुज़ूर का

है रंग-ए-नूर जिस ने दिया दो जहान कोवो नूर का दिया है मदीना हुज़ूर का

जब से क़दम पड़े हैं रिसालत-मआब केजन्नत बना हुवा है मदीना हुज़ूर का

हर ज़र्रा ज़र्रा अपनी जगह माहताब हैक्या जगमगा रहा है मदीना हुज़ूर का

क़ुदसी भी चूमते हैं अदब से यहाँ की ख़ाकक़िस्मत पे झूमता है मदीना हुज़ूर का

हो नाज़ क्यूँ न उस को, नियाज़ी ! नसीब परजिस को भी मिल गया है मदीना हुज़ूर का

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