नात लिरिक्स

Apne Maan-Baap Ka Tu Dil Na Dukha, Dil Na Dukha

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

नात ख़्वान: रईस अनीस साबरीशायर: क़ैसर सिद्दीक़ी समस्तीपुरीउपलब्ध: हिंदी

अपनी जन्नत को ख़ुदा के लिए ! दोज़ख़ न बनाअपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

मेरे मालिक, मेरे आक़ा, मेरे मौला ने कहाअपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

बाप के प्यार से अच्छी कोई दौलत क्या है !माँ का आँचल जो सलामत है तो जन्नत क्या है !ये हैं राज़ी तो नबी राज़ी है, राज़ी है ख़ुदा

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

उनकी ममता ने बहर-हाल सँभाला तुझ कोकिस क़दर प्यार से माँ-बाप ने पाला तुझ कोरहमत-ए-मौला से कुछ कम नहीं साया इन का

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

जब भी देखा तो तुझे प्यार से देखा माँ नेख़ून-ए-दिल दूध कि सूरत में पिलाया माँ नेतू ने इस प्यार के बदले में उसे कुछ न दिया

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

हर मुसीबत से बचाया ये करम है कि नहीं !बोलना तुझ को सिखाया ये करम है कि नहीं !कैसे पाला तुझे माँ-बाप ने क्या तुझ को पता !

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

तुझ को इंसान बनाया, तुझे तालीम भी दीकभी देखी ही नहीं इन की मोहब्बत की कमीक्या दिया  तू ने मगर इन की मोहब्बत का सिला

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

इन की चाहत की बदौलत है कहानी तेरीइन की क़ुर्बानी का सदक़ा है जवानी तेरीअपनी आवाज़ को नादान तू पत्थर न बना

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

देख कर तेरी जवानी को ये मसरूर हुएजो किए फ़ैसले तू ने, इन्हें मंज़ूर हुएतेरी हर बात पे माँ-बाप ने लब्बैक कहा

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

तेरे माँ-बाप ने शादी भी रचाई तेरीकिस क़दर धूम से बरात सजाई तेरीतू मगर इन के ख़यालात से बेगाना रहा

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

बीवी के आते ही चलने लगी नफ़रत की हवातुझ को बर्बाद न कर दे ये अदावत की हवायूँ गुनाहगार न बन, ख़ुद को गुनाहों से बचा

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

बूढ़े माँ-बाप को घर से जो निकाला तू नेकर लिया अपने मुक़द्दर को भी काला तू नेबाज़ आ वर्ना ख़ुदा भी न तुझे बख़्शेगा

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

जिस ने की तुझ से वफ़ा उस को सताने वालेकल तेरे नाम पे थूकेंगे ज़माने वालेतुझ से नाराज़ नबी हैं तो ख़ुदा भी है ख़फ़ा

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

तेरे माँ-बाप ने किस प्यार से पाला तुझ कोख़ुद रहे भूके, दिया मुँह का निवाला तुझ कोइन की मुट्ठी में है नादान मुक़द्दर तेरा

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

तेरे बेटे भी कहाँ रोटियाँ देंगे तुझ कोये भी तेरी ही तरह गालियाँ देंगे तुझ कोतू भी है साहिब-ए-औलाद ये क्यूँ भूल गया

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

उन से अच्छी नहीं देखी कोई सूरत, क़ैसर !है सरापा ये मोहब्बत ही मोहब्बत, क़ैसर !काम आती है बुरे वक़्त इन की ही दुआ

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

अपनी जन्नत को ख़ुदा के लिए ! दोज़ख़ न बनाअपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

अपने माँ-बाप का तू दिल न दुखा, दिल न दुखा

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