नात लिरिक्स

Bas Raha Hai Nazar Mein Madina

बस रहा है नज़र में मदीना

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीशायर: अब्दुल सत्तार नियाज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क़ाफ़िले सू-ए-तयबा चले हैं, आज फिर से मैं तन्हा खड़ा हूँजा सका न मैं अब के भी, मौला ! बस यही सोच कर रो रहा हूँ

बस रहा है नज़र में मदीना, दिल में अरमान है हाज़िरी केरोते रोते, मदीने के वाली ! बीत जाएँ न दिन ज़िंदगी के

मेरा जीना भी है कोई जीना, दूर है मुझ से तेरा मदीनाजीते-जी वो घड़ी भी तो आए, देख लूँ जल्वे तेरी गली के

बस रहा है नज़र में मदीना, दिल में अरमान है हाज़िरी केरोते रोते, मदीने के वाली ! बीत जाएँ न दिन ज़िंदगी के

मेरी उम्मत पे कर दे 'अताएँ, बख़्श दे इन की सारी ख़ताएँमुस्तफ़ा कर रहे हैं दु'आएँ, बख़्त देखो ज़रा उम्मती के

हुज़ूर ! ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाएसलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए

हुज़ूर आप जो चाहें तो कुछ नहीं मुश्किलसिमट के फ़ासिला ये चंद-गाम हो जाए

मदीने जाऊँ, फिर आऊँ, दुबारा फिर जाऊँये ज़िंदगी मेरी यूँही तमाम हो जाए

बस रहा है नज़र में मदीना, दिल में अरमान है हाज़िरी केरोते रोते, मदीने के वाली ! बीत जाएँ न दिन ज़िंदगी के

ग़म के मारों का तू आसरा है, तू नियाज़ी का मुश्किल-कुशा हैमेरे मौला ! मुझे इतना दे दे, हर बरस लूँ मज़े हाज़िरी के

बस रहा है नज़र में मदीना, दिल में अरमान है हाज़िरी केरोते रोते, मदीने के वाली ! बीत जाएँ न दिन ज़िंदगी के

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।