स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !
चलो दयार-ए-नबी की जानिब, दुरूद लब पर सजा सजा करबहारें लूटेंगे हम करम की, दिलों को दामन बना बना कर
चलो दयार-ए-नबी की जानिब, दुरूद लब पर सजा सजा कर
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !
न उन के जैसा सख़ी है कोई, न उन के जैसा ग़नी है कोईवो बे-नवाओं को हर जगह से नवाज़ते हैं बुला बुला कर
चलो दयार-ए-नबी की जानिब, दुरूद लब पर सजा सजा कर
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !
है उन को उम्मत से प्यार कितना ! करम है रहमत-शिआ'र कितना !हमारे जुर्मों को धो रहे हैं, हुज़ूर आँसू बहा बहा कर
चलो दयार-ए-नबी की जानिब, दुरूद लब पर सजा सजा कर
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !
मैं वो निकम्मा हूँ जिस की झोली में कोई हुस्न-ए-अ'मल नहीं हैमगर वो एहसान कर रहे हैं ख़ताएँ मेरी छुपा छुपा कर
चलो दयार-ए-नबी की जानिब, दुरूद लब पर सजा सजा कर
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !
यही असास-ए-अ'मल है मेरी, इसी से बिगड़ी बनी है मेरीसमेटता हूँ करम ख़ुदा का, नबी की ना'तें सुना सुना कर
चलो दयार-ए-नबी की जानिब, दुरूद लब पर सजा सजा कर
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !
अगर मुक़द्दर ने यावरी की, अगर मदीने गया मैं, ख़ालिद !क़दम क़दम ख़ाक उस गली की मैं चूम लूँगा उठा उठा कर
चलो दयार-ए-नबी की जानिब, दुरूद लब पर सजा सजा कर
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह ! व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह !
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