नात लिरिक्स

Tajdar-e-Madina Ke Jalwe Jin Ke Dil Mein Samae Hue Hain

ताजदार-ए-मदीना के जल्वे जिन के दिल में समाए हुए हैं

नात ख़्वान: ज़ुल्फ़िक़ार अली हुसैनीशायर: ख़ालिद महमूद नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ताजदार-ए-मदीना के जल्वे जिन के दिल में समाए हुए हैंदूर रह कर वो क़ुर्ब-आश्ना हैं, दिल मदीना बनाए हुए हैं

मेरे आक़ा की जिन पर नज़र है, दोनों 'आलम की उन को ख़बर हैजिन का मक़्सूद उन का ही दर है, सारे असरार पाए हुए हैं

जिन को उन की तवज्जोह ने पाला, उन की रहमत ने जिन को नवाज़ाउन गदाओं का क्या पूछते हो, वो ज़माने पे छाए हुए हैं

आल-ए-अतहर का सदक़ा 'अता हो, मुफ़्लिसी का हमारी भला होऐ सख़ी ! आप के दर पे हम भी दामन-ए-दिल बिछाए हुए हैं

मेरी औक़ात कुछ भी नहीं है, ख़ुद मेरी ज़ात कुछ भी नहीं हैमेरे सरकार का ये करम है, बात मेरी बनाए हुए हैं

आरज़ू-ए-करम दिल में ले कर, ख़ालिद ! उन के सख़ी आस्ताँ परअग़निया, औलिया, अस्फ़िया सब अपने कासे बढ़ाए हुए हैं

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