नात लिरिक्स

Apni Nisbat Se Main Kuchh Nahin Hoon Is Karam Ki Badaulat Bada Hoon

अपनी निस्बत से मैं कुछ नहीं हूँ इस करम की बदौलत बड़ा हूँ

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ख़ालिद महमूद नक़्शबंदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अपनी निस्बत से मैं कुछ नहीं हूँ, इस करम की बदौलत बड़ा हूँउन के टुकड़ों से ए'ज़ाज़ पा कर, ताजदारों की सफ़ में खड़ा हूँ

इस करम को मगर क्या कहोगे, मैं ने माना मैं सब से बुरा हूँजो बुरों को समेटे हुए हैं, उन के क़दमों में मैं भी पड़ा हूँ

देखने वालो ! मुझ को न देखो, देखना है अगर तो ये देखोकिस के दामन से वाबस्ता हूँ मैं, कौन वाली है, किस का गदा हूँ

देखता हूँ जब उन की 'अताएँ, भूल जाता हूँ अपनी ख़ताएँसर नदामत से उठता नहीं है, जब मैं अपनी तरफ़ देखता हूँ

या नबी ! अपने ग़म की कहानी, कह सकूँगा न अपनी ज़ुबानीबिन कहे ही मेरी लाज रख लो, मैं सिसकती हुई इल्तिजा हूँ

शाफ़े'-ए-मुज़निबाँ के करम ने लाज रख ली मेरे खोटे-पन कीनिस्बतों का करम है ये, ख़ालिद ! खोटा होते हुए भी खरा हूँ

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