नात लिरिक्स

Bula Lo Phir Mujhe Aye Shah-e-Bahr-o-Bar Madine Mein

बुला लो फिर मुझे ऐ शाह-ए-बहर-ओ-बर मदीने में

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बुला लो फिर मुझे, ऐ शाह-ए-बहर-ओ-बर ! मदीने मेंमैं फिर रोता हुवा आऊँ तेरे दर पर मदीने में

मैं पहुँचूँ कू-ए-जानाँ में गिरेबाँ-चाक, सीना-चाकगिरा दे काश ! मुझ को शौक़ तड़पा कर मदीने में

मदीने जाने वालो ! जाओ जाओ, फ़ी-अमानिल्लाहकभी तो अपना भी लग जाएगा बिस्तर मदीने में

सलाम-ए-शौक़ कहना, हाजियो ! मेरा भी रो रो करतुम्हें आए नज़र जब रौज़-ए-अनवर मदीने में

पयाम-ए-शौक़ लेते जाओ मेरा, क़ाफ़िले वालो !सुनाना दास्तान-ए-ग़म मेरी रो कर मदीने में

मेरा ग़म भी तो देखो, मैं पड़ा हूँ दूर तयबा सेसुकूँ पाएगा बस मेरा दिल-ए-मुज़्तर मदीने में

न हो मायूस, दीवानो ! पुकारे जाओ तुम उन कोबुलाएँगे तुम्हें भी एक दिन सरवर मदीने में

बुला लो हम ग़रीबों को बुला लो, या रसूलल्लाह !प-ए-शब्बीर-ओ-शब्बर-फ़ातिमा-हैदर मदीने में

ख़ुदाया ! वासिता देता हूँ मेरे ग़ौस-ए-आ'ज़म कादिखा दे सब्ज़-गुंबद का हसीं मंज़र मदीने में

वसीला तुझ को बू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान-ओ-हैदर काइलाही ! तू 'अता कर दे हमें भी घर मदीने में

मदीने जब मैं पहुँचू काश ! ऐसा कैफ़ तारी होकि रोते रोते गिर जाऊँ मैं ग़श खा कर मदीने में

निकाब-ए-रुख़ उलट जाए, तेरा जल्वा नज़र आएजब आए काश ! तेरा साइल-ए-बे-पर मदीने में

जो तेरी दीद हो जाए तो मेरी 'ईद हो जाएग़म अपना दे मुझे 'ईदी में बुलवा कर मदीने में

मदीने जूँ ही पहुँचा अश्क जारी हो गए मेरेदम-ए-रुख़्सत भी रोया हिचकियाँ भर कर मदीने में

मदीने की जुदाई 'आशिक़ों पर शाक़ होती हैवो रोते हैं तड़प कर, हिचकियाँ भर कर मदीने में

कहीं भी सोज़ है दुनिया के गुलज़ारों में बाग़ों में ?फ़ज़ा पुर-कैफ़ है लो देख लो आ कर मदीने में

वहाँ इक साँस मिल जाए येही है ज़ीस्त का हासिलवो क़िस्मत का धनी है जो गया दम भर मदीने में

मदीना जन्नतुल-फ़िरदौस से भी औला-ओ-आ'लारसूल-ए-पाक का है रौज़ा-ए-अनवर मदीने में

चलो चौखट पे उन की रख के सर क़ुर्बान हो जाएँहयात-ए-जावेदानी पाएँगे मर कर मदीने में

मदीना मेरा सीना हो, मेरा सीना मदीना होमदीना दिल के अंदर हो, दिल-ए-मुज़्तर मदीने में

मुझे नेकी की दा'वत के लिए रख्खो जहाँ भी काश !मैं ख़्वाबों में पहुँचता ही रहूँ अक्सर मदीने में

न दौलत दे, न सरवत दे, मुझे बस ये स'आदत देतेरे क़दमों में मर जाऊँ मैं रो रो कर मदीने में

'अता कर दो, 'अता कर दो बक़ी'-ए-पाक में मदफ़नमेरी बन जाए तुर्बत, या शह-ए-कौसर ! मदीने में

मदीना इस लिए, 'अत्तार ! जान-ओ-दिल से है प्याराकि रहते हैं मेरे आक़ा, मेरे सरवर मदीने में

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