नात लिरिक्स

Bhatak Raha Hai Kyun Aaja Hussain Ke Dar Par | Pata Milega Khuda Ka Hussain Ke Dar Par

भटक रहा है क्यूँ आजा हुसैन के दर पर | पता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर

नात ख़्वान: क़ारी शाहिद महमूद क़ादरीशायर: अल्लामा निसार अली उजागरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कितना सख़ी है दर मेरे आक़ा हुसैन काखाते हैं लोग आज भी सदक़ा हुसैन का

मेरे सख़ी हुसैन के सारे गदाओं कीरक्खेगा लाज हश्र में नाना हुसैन का

भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर परपता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर

भटक रहा है क्यूँ ? आजा

किसे पता था फ़ना क्या है और बक़ा क्या हैमेरे इमाम ने साबित किया ख़ुदा क्या हैयही तो लिक्खा है मौला हुसैन के दर परपता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर

भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर परभटक रहा है क्यूँ ? आजा

हुसैन तेरी 'इबादत पे नाज़ है सब कोसर-ए-सिनाँ पे तिलावत पे नाज़ है सब कोजभी तो झुकती है दुनिया हुसैन के दर परपता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर

भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर परभटक रहा है क्यूँ ? आजा

नबी के दीन की ख़ातिर सभी लुटा के चलेचले जो कर्ब-ओ-बला से तो सर कटा के चलेशहादतों का फ़साना हुसैन के दर परपता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर

भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर परभटक रहा है क्यूँ ? आजा

मुहर्रम आता है, लाखों दीवानें इस दर परज़माने भर को मिले आब-ओ-दानें इस दर परनहीं है कोई भी भूका हुसैन के दर परपता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर

भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर परभटक रहा है क्यूँ ? आजा

जनाब-ए-हुर्र का मुक़द्दर बना दिया तू नेग़ुलाम-ज़ादा उजागर बना दिया तू नेमिला है सोच से ज़्यादा हुसैन के दर परपता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर

भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर परभटक रहा है क्यूँ ? आजा

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