नात लिरिक्स

Arsh-e-Ula Se Aala Meethe Nabi Ka Roza | Arsh-e-Ula Se Aala Mere Nabi Ka Roza

अर्श-ए-उला से आला मीठे नबी का रौज़ा

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अर्श-ए-'उला से आ'ला मीठे नबी का रौज़ाहै हर मकाँ से बाला मीठे नबी का रौज़ा

कैसा है प्यारा प्यारा ये सब्ज़ सब्ज़ गुंबदकितना है मीठा मीठा मीठे नबी का रौज़ा

फ़िरदौस की बुलंदी भी छू सके न इस कोख़ुल्द-ए-बरीं से ऊँचा मीठे नबी का रौज़ा

मक्के से इस लिए भी अफ़ज़ल हुआ मदीनाहिस्से में इस के आया मीठे नबी का रौज़ा

का'बे की 'अज़मतों का मुन्किर नहीं हूँ लेकिनका'बे का भी है का'बा मीठे नबी का रौज़ा

आँसू छलक पड़े और बेताब हो गया दिलजिस वक़्त मैं ने देखा मीठे नबी का रौज़ा

होगी शफ़ा'अत उस की जिस ने मदीने आ करख़्वाह इक नज़र भी देखा मीठे नबी का रौज़ा

बादल घिरे हुए हैं, बारिश बरस रही हैलगता है क्या सुहाना मीठे नबी का रौज़ा

हिज्र-ओ-फ़िराक़ में जो, या रब ! तड़प रहे हैंउन को दिखा दे, मौला ! मीठे नबी का रौज़ा

हज़्दा-हज़ार 'आलम का हुस्न उस पे क़ुर्बांदोनों जहाँ का दूल्हा मीठे नबी का रौज़ा

उस आँख पर न क्यूँकर क़ुर्बान मेरी जाँ होजिस आँख ने है देखा मीठे नबी का रौज़ा

जिस वक़्त रूह तन से 'अत्तार की जुदा होहो सामने, ख़ुदाया ! मीठे नबी का रौज़ा

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