उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi kucha-e-aghyar mein zam honi hai

ज़िंदगी कूचा-ए-अग़्यार में ज़म होनी है

زندگی کوچۂ اغیار میں ضم ہونی ہے

शायर: Usman Alvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी कूचा-ए-अग़्यार में ज़म होनी है
हम से तक़दीर-ए-जुनूँ ख़ाक रक़म होनी है

ज़ब्त का हुक्म न कर छोड़ के जाने वाले
कोई पत्थर तो नहीं आँख है नम होनी है

सुब्ह से सोच के हलकान हुआ जाता हूँ
हाए मौला कि अभी शाम-ए-अलम होनी है

जाने कब बाल समेटेगी ये काली डायन
जाने कब सुब्ह शहीद-ए-शब-ए-ग़म होनी है

ये मिरी 'ऐन जवानी का मो'अम्मा है मियाँ
'इश्क़ वो आग नहीं है जो भसम होनी है