उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum apni marzi ka wahshat-kada banaenge

हम अपनी मर्ज़ी का वहशत-कदा बनाएँगे

ہم اپنی مرضی کا وحشت کدہ بنائیں گے

शायर: Usman Alvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम अपनी मर्ज़ी का वहशत-कदा बनाएँगे
ख़ला बनाया तो सीना खुला बनाएँगे

जो ले के जाता हूँ ख़्वाबों के दाएरों से परे
हम अपनी रात में वो रास्ता बनाएँगे

वो सर्द शाम में छुपता हुआ नहीफ़ बदन
कहीं मिला तो उसे आग का बनाएँगे

तरीर ख़ाक उड़ाएँगे अपनी मिट्टी से
और इस्म पढ़ के उसे फ़ाख़्ता बनाएँगे

मिटाएँगे कभी फ़र्क़-ए-नबूद-ओ-बूद-ए-जहाँ
और इक जहान को बनता हुआ बनाएँगे