उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rang jab koi lab-e-dida-e-tar aaega

रंग जब कोई लब-ए-दीदा-ए-तर आएगा

رنگ جب کوئی لب دیدۂ تر آئے گا

शायर: Usman Alvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंग जब कोई लब-ए-दीदा-ए-तर आएगा
नक़्श क्या क्या न कफ़-ए-ख़ाक में दर आएगा

हफ़्त अफ़्लाक के आहंग-ए-फ़रामोशी को
देखते रहिए कि दीवार में दर आएगा

मैं तो बच बच के ज़माने से चलूँगा लेकिन
आने वालों को मिरा नक़्श नज़र आएगा

जाने कब हद-ए-ज़माँ और मकाँ रास्ता दें
एक सय्यारा उधर है जो इधर आएगा