उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi ko ek kahani de gaya

ज़िंदगी को इक कहानी दे गया

زندگی کو اک کہانی دے گیا

शायर: Zafar Mahmood zafar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी को इक कहानी दे गया
हम-सफ़र अपनी निशानी दे गया

अब्र रोया आंसुओं से इस क़दर
सूखे दरिया को भी पानी दे गया

रख गया वीरानी-ए-गुलशन को पास
और मुझ को बाग़बानी दे गया

जागती आँखों में रख कर ख़्वाब सा
ज़िंदगानी को रवानी दे गया

बूढ़ा बरगद पी गया सूरज की आग
धूप कैसी साएबानी दे गया

अपने बच्चों की शरारत से लगा
मेरा बचपन दौर-ए-सानी दे गया

अब 'ज़फ़र' बस एक मौसम याद है
प्यार की जो इक निशानी दे गया