उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi ka koi his kaise ada karte hain

ज़िंदगी का कोई हिस कैसे अदा करते हैं

زندگی کا کوئی حس کیسے ادا کرتے ہیں

शायर: Kaif Moradaabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी का कोई हिस कैसे अदा करते हैं
जो मोहब्बत नहीं करते हैं वो क्या करते हैं

दर्स-ए-इबरत है दम-ए-सुब्ह नुज़ूल-ए-शबनम
गुलसिताँ रोता है और फूल हँसा करते हैं

तालिबान-ए-करम-ए-यार तलब से पहले
अपने दामन की तरफ़ देख लिया करते हैं

उन की मर्ज़ी है हमें याद करें या न करें
हम ब-हर-हाल उन्हें याद किया करते हैं

ज़िंदा दरगोर हूँ मैं कसरत-ए-आलाम से 'कैफ़'
लोग फिर भी मिरे जीने की दु'आ करते हैं