उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai junun-e-bandagi-e-shauq ye kya kar diya

ऐ जुनून-ए-बंदगी-ए-शौक़ ये क्या कर दिया

اے جنون بندگیٔ شوق یہ کیا کر دیا

शायर: Kaif Moradaabadi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ जुनून-ए-बंदगी-ए-शौक़ ये क्या कर दिया
उन के धोके में न जाने किस को सज्दा कर दिया

ख़ुद उन्हों ने अपना राज़-ए-हुस्न अफ़्शा कर दिया
जिस तरफ़ भी आँख उठाई हश्र बरपा कर दिया

काश वो ग़म ता-अबद दिल पर रहे साया-फ़गन
जिस ने दिल को बे-नियाज़-ए-दीन-ओ-दुनिया कर दिया

तुम ही सोचो 'कैफ़' अब किस का हो मुझ को ए'तिबार
ख़ुद मिरी आँखों ने मेरा राज़ अफ़्शा कर दिया