उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil gham se bhi bezar hai malum nahin kyon

दिल ग़म से भी बेज़ार है मा'लूम नहीं क्यों

دل غم سے بھی بیزار ہے معلوم نہیں کیوں

शायर: Kaif Moradaabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल ग़म से भी बेज़ार है मा'लूम नहीं क्यों
ये ऐश भी अब यार है मा'लूम नहीं क्यों

आलम हमा दिलदार है मा'लूम नहीं क्यों
जो ग़म है ग़म-ए-यार है मा'लूम नहीं क्यों

अब हुस्न भी कुछ सामने आने में है मोहतात
अब इश्क़ भी ख़ुद्दार है मा'लूम नहीं क्यों

वो इश्क़ जो हर जल्वा-ए-रंगीं पे फ़िदा है
ख़ुद अपना तलबगार है मा'लूम नहीं क्यों

कुछ रोज़ से वो 'कैफ़' जो इक गोशा-नशीं था
रुस्वा सर-ए-बाज़ार है मा'लूम नहीं क्यों